रविवार, 25 अक्टूबर 2015

Bhagwati Vandana

भगवतीक वंदना

हे माय उपाय करू पुत्रक, संसार सगर सं" भटकल छी।
कोरा छोरि अहां केर जननी, रोरा में आबि क अटकल छी॥
हे माय ................................

जौं जन्म अहां देने छी माता, कर्म किआ हरि नेने छी ।
करू क्षमां मातु अपराध हमर सबटा हम जे जे केने छी॥
हे माय .................................

हे माय स्नेह सं" जुडा दियअ, पापक जंजीर सं" छोरा दियअ।
तजि देब चरण पर प्राण एतै, नहिं तं" अभिलाषा पुरा दियअ॥
हे माय .................................

हम एखन बनल धानक भूसा, सूपक समाज सं" फटकल छी।
छोरि अहां केर चरण हे माय, रोरा में आबि क अटकल छी॥
हे माय ................................

हम पापक धार मे फंसि कए जननी, दुइ आंखि रहीत अन्हराएल छी।
भेल बात कुबात एखन जे अहींक, आंगन में हम बौआयल छी॥
हे माय उपाय करू पुत्रक, संसार सगर सं" भटकल छी।
कोरा छोरि अहां केर जननी, रोरा में आबि क अटकल छी॥
हे माय ................................

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